The Story of a Tale
Saturday, January 9, 2016
Bepanah !
ख्वाईशें उड़ती रहती हैं बेपरवाह,
जो हो पूरी सो अपनी,
जो ना ...... सो बेवफ़ाह,
प्यार हर तमन्ना से मेरा झूठा,
इश्क़ हर ख़याल से बेपनाह !
-copyright belongs to Satbir Singh
Wednesday, January 6, 2016
Khudi
अपना आपा खोने को आपे से बाहर रहते हो,
होश की बातें करते हो और होश से बाहर रहते हो !
-copyright belongs to Satbir Singh
Tuesday, January 5, 2016
Gunaah !
वो रात और थी जब बेपरवाह थी जन्नत ,
नूर-ओ-सहर भी अब शम्मा की पनाह मांगती है ,
सर्द पड़ी हुई हैं उम्मीद की हड्डियाँ आज,
कि रब की बंदगी भी अब गुनाह मांगती है !
-copyright belongs to Satbir Singh
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